जम्मू-कश्मीर में पिछले दो दिनों के भीतर तीन अलग-अलग स्थानों पर हुए भीषण हिमस्खलन ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। लगातार हो रही भारी बर्फबारी और मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जमी बर्फ खिसक गई, जिससे कई इलाकों में खतरे की स्थिति बन गई। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने तुरंत रेस्क्यू और निगरानी अभियान तेज कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, हिमस्खलन की घटनाएं कुपवाड़ा, गांदरबल और सीमा से सटे कुछ ऊंचे इलाकों में दर्ज की गईं। इनमें से कुछ जगहों पर सड़कों पर बर्फ और मलबा आ जाने से यातायात बाधित हो गया, जबकि सेना और स्थानीय प्रशासन ने एहतियातन आवाजाही रोक दी। राहत की बात यह रही कि समय पर अलर्ट जारी होने के कारण जान-माल के बड़े नुकसान की खबर नहीं है, हालांकि कुछ इलाकों में अस्थायी ढांचे और रास्तों को नुकसान पहुंचा है।
आपदा प्रबंधन अधिकारियों का कहना है कि बीते कुछ दिनों से हो रही लगातार बर्फबारी ने हिमस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ा दिया है। इसके साथ ही दिन और रात के तापमान में अंतर भी बर्फ के खिसकने की बड़ी वजह बन रहा है। सुरक्षा बलों और आपदा राहत टीमों को संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
प्रशासन ने स्थानीय लोगों, चरवाहों और पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा से फिलहाल बचें। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बर्फबारी की संभावना जताई है, जिससे हिमस्खलन का खतरा बना रह सकता है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर में सर्दियों का यह दौर एक बार फिर चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है और सभी की नजरें अब मौसम और प्रशासन की तैयारियों पर टिकी हुई हैं।




